You are currently viewing चाँद में लग रहा है जंग – Moon Rusting

चाँद में लग रहा है जंग – Moon Rusting

इसरो द्वारा प्रकाशित किए गए जानकारी से पता चलता है कि पृथ्वी के उपग्रह चन्द्र्मा पर जंग लग रहा है। नए शोध का कहना है कि चन्द्रमा का रंग हल्का सा लाल हो रहा है,इसका कारण है चन्द्रमा की सतह पर हेमाटाइट की मौजूदगी।

हेमाटाइट ( Hematite ) क्या है ?

लोहे के हल्के लाल और काले रंग को हेमाटाइट या आयरन ऑक्साइड भी कहते हैं।
चन्द्रमा पर जंग और आयरन ऑक्साइड की मौजूदगी के दो कारण हो सकते हैं।

पानी और ऑक्सीजन। यह दोनों जब आयरन के कांटेक्ट में आते हैं तो आयरन ऑक्साइड बनता है।चन्द्रमा की सतह पर लोहे युक्त पत्थर बिखरे पड़े हैं जिस पर जंग लगने की संभावना है, लेकिन चन्द्रमा पर पानी का कोई बड़ा स्रोत नहीं है और वातावरण नहीं होने के कारण ऑक्सीजन भी नहीं है।

फिर कैसे लग रहा है जंग ?

शोधकर्ताओं ने chandrayaan-1 पर लगे हुए एक डिवाइस मून मिनिरोलॉजी मैपर (M3) के द्वारा जुटाए गए डेटा के आधार पर यह पाया कि चांद की ध्रुवीय रचना सतह की रचना से अलग है।

घटना में पृथ्वी के वातावरण का भी योगदान है. लोहे में जंग लगने के लिए ऑक्सिडाइजर की जरूरत होती है जिनका काम होता है लोहे से इलेक्ट्रॉन ले लेना। पहले आशंका जताई गई कि सौर पवन में बढे हुए हाइड्रोजन के कारण यह हो सकता है, लेकिन असल में इसका परिणाम विपरीत होता है। हाइड्रोजन ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक लेता नहीं है बल्कि दे देता है, बाद में पाया गया कि चन्द्रमा पर वातावरण तो नहीं है लेकिन यह पृथ्वी से थोड़ा सा ऑक्सीजन जरूर प्राप्त करता है।

शोधकर्ता इसे मैग्नेटो टेल कहते हैं यानि किसी भी ग्रह के मैग्नेटोस्फीयर का बढ़ जाना। 2007 में जापान के कागुया ऑर्बिटर ( Kaguya Orbiter ) के द्वारा यह पता चला कि पृथ्वी से थोड़ा सा ऑक्सीजन चन्द्रमा पर भी मिलता है जो कि 385000 किलोमीटर दूर स्थित है।

थोड़ा सा आकसीजन चन्द्रमा के उस भाग को मिलता है जिसका चेहरा पृथ्वी की तरफ है। इसी मैग्नेटोटेल के कारण, हाइड्रोजन, चन्द्रमा की उस भाग पर असर नहीं कर पाता जहां पृथ्वी के वातावरण का ऑक्सीजन पहुंचता है।

ज्ञात हो कि अगस्त 28, 2009 को चंद्रयान-1 ने यह खोजा था कि चांद के ध्रुव पर परछाई वाले इलाके में जमी हुई बर्फ के रूप में पानी मौजूद है और अब जब हेमाटाइट मिला है तो शोधकर्ताओं का दावा है की तेज गति से घूमते हुए धूलकणों के बर्फ से टकराने के कारण बर्फ, लोहे युक्त पत्थरों से मिलता है और मैग्नेटोटैल से मिला ऑक्सीजन जंग के निर्माण में मदद करता है।

हालांकि चांद की दूरी पृथ्वी से धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे इस प्रक्रिया की गति पर भी असर होने का अनुमान है। ज्ञात हो कि चंद्रयान-1 द्वारा खोजे गए पानी की मौजूदगी के कारण विश्व भर में इसरो की प्रशंसा की गई और कई देशों में चांद पर जाने की होड़ लग गई। पानी की मौजूदगी कई चीजों में मदद कर सकता है और अगर चांद से स्पेस मिशन चलाया जाए तो वह सस्ता भी हो सकता है

NASA और ISRO के द्वारा किये गए पब्लिश आर्टिकल को पढ़ने क लिए यहाँ क्लिक करें।

Leave a Reply